हमेशा दूसरों की मदद करें, ताकि बुरे समय में वे भी आपकी सहायता कर सकें।

यदि आप दूसरों की मदद करने के लिए खड़े होते हैं, तो दूसरे भी आपकी मदद के लिए खड़े होंगे। 

एक बार एक शंकर नाम का एक लड़का था। वह बहुत गरीब परिवार से था। एक दिन वह किसी जंगल से गुजर रहा था। तभी, उसकी नज़र एक बुजुर्ग व्यक्ति पर पड़ी जो बहुत भूखा था। शंकर उन्हें भोजन देना चाहता था, लेकिन उस समय शंकर के पास खुद के लिए भोजन नहीं था। खुद को असमर्थ पाकर शंकर उदास मन से आगे बढ़ गया। रास्ते में, शंकर को एक प्यासा हिरण दिखाई दिया।

शंकर हिरण को पानी पिलाना चाहता था, लेकिन उस समय उसके पास खुद के लिए भी पानी नहीं था। वह दुखी मन से फिर आगे बढ़ा। आगे चलकर रास्ते में शंकर को एक व्यक्ति मिला, जो एक शिविर बनाना चाहता था। उसके लिए उसे कुछ लकड़ी की जरूरत थी। शंकर ने उस व्यक्ति की समस्या सुनी और उसे उससे कुछ लकड़ी  दे दी। बदले में उस व्यक्ति ने शंकर को कुछ भोजन और कुछ पानी दिया।

भोजन और पानी के साथ, शंकर जंगल में लौट रहा था। तभी उसने वहाँ उस बुजुर्ग व्यक्ति को भोजन दिया और प्यासे हिरण को पानी पिलाया। भोजन और पानी पाकर बुजुर्ग आदमी और हिरण बहुत खुश हुए। शंकर भी खुशी-खुशी अपने घर लौट आया। एक दिन शंकर अचानक एक पहाड़ी से गिर गया। वह उठ नहीं पा रहा था और उस समय उसकी मदद करने वाला कोई नहीं था। शंकर दर्द से चिल्ला रहा था।

अचानक एक व्यक्ति की नजर उस शंकर पर पड़ी। वह व्यक्ति  वही शख्स था जिसे उस शंकर ने जांगले में भोजन दिया था। उस व्यक्ति ने भी शंकर को पहचान लिया। उसने जाकर शंकर को उठाया। शंकर को बुरी तरह से घायल था और उसे बहुत पीड़ा हो रही थी। उसी समय कहीं से वह हिरण भी आ गया, जिसे शंकर ने पानी पिलाया। शंकर के घावों को देखकर, वह जल्दी से जंगल से कुछ जड़ी-बूटियाँ ले आया। उन जड़ी-बूटियों से कुछ दिनों बाद, शंकर के घाव ठीक होने लगे। वे सभी बहुत खुश थे, क्योंकि वे एक-दूसरे की मदद करने में सक्षम थे।