किसी की तारीफ या बुराई करने से हमारा विश्वास नहीं डगमगाना चाहिए

अपने पथ पर हमेशा कायम रहें। 

किसी गांव में वसंत नाम का वृद्ध व्यक्ति रहता था। वसंत के पास एक सफेद घोड़ा था, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आया करते थे। एक व्यापारी उस घोड़े को देखकर मोहित हो गया। उसने वसंत को उसका मुंहमांगा दाम देने की बात की, लेकिन वसंत घोड़ा बेचने के लिए तैयार नहीं था। घोड़ा उसके परिवार के सदस्य की तरह था। जब व्यापारी के बहुत मनाने पर भी वसंत नहीं माना, तब गांव वाले वसंत के पास आकर कहने लगे, तुम इतना बड़ा मौका क्यों छोड़ना चाह रहे हो? इससे तुम्हारी किस्मत बदल सकती है।

लेकिन वसंत का हमेशा एक ही जवाब होता, जो होगा, वह अच्छा ही होगा। एक दिन सुबह वसंत ने देखा कि घोड़ा अस्तबल में नहीं है। गांव वालों ने वसंत की खूब खिल्ली उड़ाई और कहा, यह तुम्हारी बदकिस्मती है कि तुमने इतना अच्छा अवसर छोड़ दिया। वसंत बोला, जो होगा, वह अच्छा होगा। एक दिन एकाएक वसंत का घोड़ा वापस आ गया। पर वह अपने साथ पांच और घोड़ों को ले आया, जो वैसे ही खूबसूरत थे।

उन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग आने लगे। गांव वालों की अच्छी-खासी आमदनी होने लगी। उन्होंने वसंत को दुआएं दीं और कहा, तुम्हारी वजह से हमारी किस्मत बदल गई। तुम हमारे गांव की शान हो। पर वसंत पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। उसने फिर कहा, जो होगा, अच्छा होगा। कुछ दिनों बाद गांव में महामारी फैली। लोग महामारी के लिए घोड़ों को कसूरवार ठहराने लगे।

इसके चलते घोड़ों को गांव से बाहर निकाला जाने लगा। गांव वालों ने फिर वसंत को कोसते हुए कहा, तुम्हारी वजह से महामारी फैली। वसंत ने फिर कहा, जो होगा, अच्छा होगा। जब घोड़ों को गांव से निकाला जाने लगा, तो वही व्यापारी वापस उस गांव में आया और उसने सारे घोड़े खरीद लिए, और उसके बदले गांव में एक बड़ा अस्पताल बनवाया। अस्पताल में इलाज कराते हुए लोगों ने फिर वसंत को दुआएं दीं।

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